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धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी के मामले को हल्के में नहीं ले रहे आला अफसरान, कप्तान के आदेश पर एसपी देहात ने बिसौली में डाला डेरा, फ्लैग मार्च में हूटर की आवाज से सहमे लोग, बड़े अधिकारियों का कोतवाल से क्यों उठा भरोसा और आक्रोशित भीड़ के डर से इंस्पेक्टर ने क्या कदम उठाया? पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें 👇👇 👇👇

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बिसौली। मजार में घुसकर धार्मिक ग्रंथ को जलाने के मामले को आला अफसरान हल्के में नहीं ले रहे हैं। हांलाकि कोतवाली पुलिस द्वारा 24 घंटे में खुराफाती तत्वों का खुलासा कर आरोपियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन देने के बाद समुदाय विशेष के लोगों का आक्रोश कम हुआ तब जाकर अधिकारियों की सांस में सांस आई। बावजूद इसके एसपी देहात केके सरोज जो पूर्व में यहां इंस्पेक्टर रह चुके हैं ने दोपहर बाद नगर में डेरा डाल दिया। शाम को पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्री सरोज के नेतृत्व में भारी पुलिसबल के साथ नगर में फ्लैग मार्च किया गया। इस दौरान वाहनों में लगे हूटर बजे तो नगरवासी सिहर उठे। सायरन की आवाज के साथ पुलिस ने मुख्य मार्ग के अलावा नगर के संवेदनशील स्थानों पर रूटमार्च किया। फिलहाल नगर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

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शहर काजी के घर पहुंचकर कोतवाल ने ली तहरीर, चेयरमैन अबरार अहमद का लिया सहारा

कलाम-ए-पाक की बेहुरमती से गुस्साए समुदाय विशेष के लोगों ने पूरे नगर में अपने प्रतिष्ठान बंद कर विरोध जताया। शहर काजी व मजार के सज्जादानशीं भूरेशाह के नेतृत्व में सैंकड़ों लोग कोतवाली परिसर पहुंचने की तैयारी में जुट गये। प्रशासन को जब जानकारी हुई तो इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार सिंह स्वयं शहर काजी के घर पहुंच गए। कोतवाल ने चैयरमेन अबरार अहमद के साथ मिलकर बमुश्किल आक्रोशित भीड़ को शांत कराया। इंस्पेक्टर ने 24 घंटों में आरोपियों को गिरफ्तार कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर लोगों का गुस्सा शान्त हुआ।

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आला अफसरान का इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार सिंह से उठा भरोसा

ऐसा महसूस किया जा रहा है कि आला अधिकारी उक्त मामले में अब कोतवाली पुलिस पर ही भरोसा नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि कप्तान डा. ब्रजेश सिंह ने एसपी देहात केके सरोज को भेजकर स्थिति संभालने का कदम उठाया। श्री सरोज ने शाम को भारी पुलिसबल के साथ नगर में फ्लैग मार्च निकालकर असामाजिक तत्वों को सख्त संदेश दे दिया। आला अफसरान का कोतवाल से भरोसा उठने का कारण नवरात्र के प्रथम दिन मोहल्ला वीरबाबू बगिया में बवाल के बाद डैमेज कंट्रोल करने में असमर्थता बताई जा रही है। उक्त मामले में कोतवाल साहब अभी कुछ कर भी नहीं पाए थे कि खुरापाती तत्वों ने मजार में घुस धार्मिक ग्रंथ को जलाकर पुलिस को खुल्लमखुल्ला चुनौती दे डाली। सवाल यह उठता है कि आखिर इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार सिंह पीस कमेटी की बैठक कर ही शांति व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने वीरबाबू बगिया कांड से जुड़े आरोपियों पर सख्त कार्रवाई किस डर से नहीं की। काश उक्त मामले में पुलिस ने खुरापातियों पर अंकुश लगाया होता तो दशकों से चली आ रही नगर की गंगा जमुनी तहजीब बिगाड़ने का कुत्सित प्रयास न हुआ होता।

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